भगवान शंकर को देवों के देव महादेव कहकर संबोधित किया जाता है। वेदों के अनुसार भगवान शंकर को निर्गुण निराकार रूप में लिंग के रूप में पूजा जाता है।
काल अनेक,………… महाकाल एक..
देव अनेक,……………. महादेव एक..
शक्ति अनेक,………… शिवशक्ती एक..
देव अनेक,……………. महादेव एक..
शक्ति अनेक,………… शिवशक्ती एक..
नाम अनेक, ………….. भोलेनाथ एक..
नेत्र अनेक, ………….. त्रिनेत्रधारी एक..
त्रिशूल अनेक,……… त्रिशूलधारी एक..
सर्प अनेक,…………… सर्पधारी एक…
चंद्र अनेक,……………. चंद्रधारी एक..
जटा अनेक,………….. जटाधारी एक..
राग अनेक,………………. वैरागी एक..
वाश अनेक,……………. शन्याषि एक..
दिशा अनेक,……. दशो दिशापती एक..
मंत्र अनेक,………… “ॐ” मंत्र एक..
नाथ अनेक,…………… सोमनाथ एक..
नेत्र अनेक, ………….. त्रिनेत्रधारी एक..
त्रिशूल अनेक,……… त्रिशूलधारी एक..
सर्प अनेक,…………… सर्पधारी एक…
चंद्र अनेक,……………. चंद्रधारी एक..
जटा अनेक,………….. जटाधारी एक..
राग अनेक,………………. वैरागी एक..
वाश अनेक,……………. शन्याषि एक..
दिशा अनेक,……. दशो दिशापती एक..
मंत्र अनेक,………… “ॐ” मंत्र एक..
नाथ अनेक,…………… सोमनाथ एक..
जो अमृत पीते हैं उन्हें देव कहते हैं,
और जो विष पीते हैं उन्हें देवों के देव
“महादेव” कहते हैं …
और जो विष पीते हैं उन्हें देवों के देव
“महादेव” कहते हैं …
How to Worship Lord Shiva
सावन का महीना शुरू हो रहा है। ये माह शिव जी की पूजा के लिए समर्पित होता है। इस महीने में भगवान शिव का पूजन करने से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं आैर यदि पूजा में बेलपत्र का प्रयोग किया जाए तो शंकर जी आैर भी प्रसन्न हो जाते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें